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Showing posts from February, 2020

Na Jaane Kyu? | Human Mindsets/Mentality | Life | Hindi Poetry Eng Subs ...

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ना जाने क्यूँ ? अहमियत कहाँ रह गयी इंसान की  इंसान को ही सीढ़ी बना ऊँचायिया चढ़ जाते है लोग  ना जाने क्यू इतना नीचे गिर जाते है लोग  बस देखने का नज़रिया है ए-दोस्त  यहाँ तो हीरे को भी पत्थर  बताते है लोग  ना जाने क्यू पत्थर की चमक में चकाचोंद्द हो जाते है लोग  ख़रीदने चले यह रिश्ते नाते  प्यार मोहब्बत का करके मोल भाव  इस व्यापार में  ना जाने क्यू अपना सब कुछ बेच आते है लोग  सब मिल जाए यह ज़रूरी तो नहीं  फिर भी अरमानो के मेले लगाते है लोग  खवाइशें पूरी करते करते  ना जाने क्यू  अपना चैन भी गवाँ देते है लोग  क़तरा के गुज़रते है, जैसे ना जान ना पहचान  पर अपनी ज़रूरत पे मुस्कुरा देते है लोग  ना जाने क्यू मतलब के लिए रिश्ते बना लेते है लोग  ख़ुद आइना देखना भूल गए शायद  आजकल सिर्फ़ औरों के नुक़्स निकलते है लोग  अपने दुःख से दुखी कहाँ  तु घाव खोल के बैठ, देख कैसे नमक लगाते है लोग  ना जाने क्यू औरों की बर्बादियों पे शौक़ ...

Bachpan

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बचपन  वो शरारते , वो तेरी अठखेलियाँ तेरे नाज़ और नख़रे उठाने को जी चाहता है / वो चंचलता, वो  तेरा भोलापन, मेरा दिल तुझपे सौ जहान वारता है / मुझसे मार खाके तु जब मुझे ही गले लगाता  है, मानो सरा ग़ुस्सा पिघल सा जाता है / आज तुझे देख कर लगता है , तुझमें मेरा बचपन खिलखिलाता है  / हर  लम्हा यूँ   रेत सा फिसलता जाता है  छू लूँ तुझे, महसूंस करके जी लूँ अभी  अभी तो गोद मैं लिया था मैंने, आज तेरा कद मुझसे भी उँचा जाता है  मेरी जान, यादें संजो लूँ सारी आज, बचपन गया तो कहाँ लौट के आता है  आज तुझे देख कर लगता है  तुझमें मेरा बचपन खिलखिलाता है   करने चला बचपन की दहलीज़ पार तु  बचपन छोड़ देगा तुझे, तु छोड़ना ना अपना बचपना कभी  जी भर के जी ऐसे ,  यह ज़िंदगी आज है  और बस अभी  और ना जाने कितनी दुआ मेरा दिल देना चाहता है  आज तुझे देख कर लगता है  तुझमें मेरा बचपन खिलखिलाता है   --कीर्ति