Bachpan








वो शरारते , वो तेरी अठखेलियाँ
तेरे नाज़ और नख़रे उठाने को जी चाहता है /
वो चंचलता, वो  तेरा भोलापन,
मेरा दिल तुझपे सौ जहान वारता है /
मुझसे मार खाके तु जब मुझे ही गले लगाता  है,
मानो सरा ग़ुस्सा पिघल सा जाता है /
आज तुझे देख कर लगता है ,
तुझमें मेरा बचपन खिलखिलाता है  /

हर  लम्हा यूँ   रेत सा फिसलता जाता है 
छू लूँ तुझे, महसूंस करके जी लूँ अभी 
अभी तो गोद मैं लिया था मैंने,
आज तेरा कद मुझसे भी उँचा जाता है 
मेरी जान, यादें संजो लूँ सारी आज,
बचपन गया तो कहाँ लौट के आता है 
आज तुझे देख कर लगता है 
तुझमें मेरा बचपन खिलखिलाता है  


करने चला बचपन की दहलीज़ पार तु 
बचपन छोड़ देगा तुझे,
तु छोड़ना ना अपना बचपना कभी 
जी भर के जी ऐसे , 
यह ज़िंदगी आज है  और बस अभी 
और ना जाने कितनी दुआ मेरा दिल देना चाहता है 
आज तुझे देख कर लगता है 
तुझमें मेरा बचपन खिलखिलाता है  



--कीर्ति 

Comments

Popular posts from this blog

For all you beautiful ladies!...I am a Woman and I am proud to be!

भ्रस्टाचार

On a Journey called 'Life'... अभी चलना बहुत है