भ्रस्टाचार...कुछ और विचार

कल भी गुलाम थे आज भी है लाचार,
फर्क सिर्फ इतना है, 
कल अंग्रेज़ों के गुलाम थे 
आज राज करता है भ्रस्टाचार 


खूबसूरती तो बसती है देखने वाले की आँखों में,
फिर क्यों महिलाओं के पहनावे पे BAN लगाते है,
पहनावा ही जिम्मेदार है तो,
क्यों आये दिन बच्चियों  के साथ भी हादसे हो जाते है?
मोमबत्तियां जल के राख हो गई, चंद लम्हो के लिए हुआ विचार 
कुछ फैसला हुआ नहीं, हाथ पे हाथ धरे बैठी सरकार   
पर दूर न हो यह भ्रस्टाचार, पर दूर न हो यह भ्रस्टाचार 


कहने को तो हम लाखों में कमाते है,
देश उन्नति के लिए आयकर भी जमा कराते है 
Facilities के नाम पर GST की मार खाते है 
बचे कुचे स्कूल एडमिशन में Management Quota में दे आते है 
काम जल्दी कराने लिए, अफसरों को चाय पानी भी पिलाते है 
इन सब में हम भी तो है भागीदार 
फिर क्यों करते है?
हाय रे भ्रस्टाचार, हाय रे भ्रस्टाचार!


--कीर्ति 

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